क्यों अपनी इन हरकतों से आखिर ये ज़माना बाज़ नहीं आता है। क्यों अपनी इन हरकतों से आखिर ये ज़माना बाज़ नहीं आता है।
पलकें कभी आंखों पर बोझ नहीं होती दोस्ती कभी बेवजह नहीं होती। पलकें कभी आंखों पर बोझ नहीं होती दोस्ती कभी बेवजह नहीं होती।
वक्त ना होकर भी वक्त देते हैं, अपना कीमती वक्त अपने दोस्त अदा करते हैं, वक्त ना होकर भी वक्त देते हैं, अपना कीमती वक्त अपने दोस्त अदा करते हैं,
खुदा गवाह खुदा गवाह
औरत की अग्नि परीक्षा युगों युगों से चली आ रही, नारी भेद दुधारी कब तक? सीता की सी अग् औरत की अग्नि परीक्षा युगों युगों से चली आ रही, नारी भेद दुधारी कब तक? स...
जो हम सोचते हैं वो हमें कम ही मिलता है , मंजिल तो नहीं मिलती पर हाँ रास्ता नज़र आ जाता है जो हम सोचते हैं वो हमें कम ही मिलता है , मंजिल तो नहीं मिलती पर हाँ रास्ता नज़र आ...